Music
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टीस ह्रदय में रोज दहकती साँझ ढले. अम्बर विशाल कुछ पूछे मुझसे साँझ ढले. मैं शब्दहीन चुपचाप निहारूँ तारों को. एक नीरधार देती उत्तर सब प्रश्नों का. मैं दीन हीन निर्लज्ज खड़ा वीराने में. सोचू क्य…
किसी पर्वत से भिड़ जाने की, बादल बन के उड़ जाने की सूरज संग पेंच लड़ाने की मेरी अभिलाषा बाकी है. सपने जिंदा हैं मरें नहीं, अरमां अभी पूरे करे नहीं ऊँचे अभी पेंग बढ़ाने की मेरी अभिलाषा बाकी…
मेरे होने न होने का वजूद नहीं है. क्यूँ ऐसे हालात पैदा हुए हैं? क्यों मेरा फलसफा सिर्फ मेरा है? ऐसा तो नहीं था मैं और ना ही तुम. मैं अकेला जी रहा हूँ और तुम भी. मेरा समाज मर चुका है. और तु…
कविता अधूरी है प्यार की. मेरी ज़िन्दगी की तरह. तुम आ जायो प्रिये. मुझे गीत लिखना है . मेरे प्यार का. मुझे दर्द बताना है. मेरे दिल का. तुम घुल चुके हो. मेरी साँसों में. जैसे शकर घुलती है. प…
प्रिये, मुझे अकेला छोड़ दो प्रतिकूल समय और परिस्तिथियों में, मुझे अकेला छोड़ दो. इसे तुम स्वार्थ कहो या मेरा अभिमान, या मुझे कुछ और नाम दो, जो तुम्हे सूझता हो, और मुझे अकेला छोड़ दो. वक़्…
कल जो मेरे साथ में था, तन्हा-तन्हा वो जाने क्यूँ? उनके दिल की ही वो जाने, अपने दिल की वो जाने क्यूँ? चट्टानों में आग लगी, क्यूँ धुँआ उठा वो जाने क्यूँ? बुरा वक़्त है, हवा बुरी, अब वो हमको पहचाने…
महान क्रांतिकारी कवी और शायर आशुतोष जी का अवतरण राजस्थान के नागौर जनपद के एक अस्पताल में चैत की अष्टमी संवत २०३७ को माना जाता है . हालाँकि इनकी जन्म तिथि के बारे में विद्वानों में मतभेद हैं. कु…
ख़ुल के जियो भुला के अपराधबोध खुद को बेहतर बना लो कल के लिए सुबह फिर एक अपनी करो शाम फिर एक अपनी लिखो इंसान ही करता है गलती एक सज़ा उम्र भर दो खुद को उसकी ये तकाज़ा नहीं रखो अपनी बात कहो अपनी बा…
पिता बनने का सुख महसूस किया मैंने अब बिलकुल अपने पिता की तरह लगता हूँ मैं नौ महीने एक एक दिन एक माँ की तरह महसूस किया मैंने रोज इंतज़ार किया बेचैनी से जैसे प्रेयसी वादा कर के गयी हो कुछ भी हो मैं ज…
साँसों से घुटती ज़िन्दगी हर रोज मर रही थी पल पल मौत की दुआ मांगते लोग तन्हा अकेले हर पल मौत से बचना नामुमकिन बस आसान होगी या मुश्किल यही है दुविधा बोझ हर घड़ी सपनो का , अपनों का गरीबी मानती नहीं…
नूतन वर्ष का मेरा नूतन ख्वाब मैं देखना चाहूँगा नए साल में सबके सपने पूरे होते जैसे मेरे हुये मैं चाहूँगा हर भूख को रोटी मिले रोज़ मेरे हर भाई को काम मिले जिसे मैं जानता हूँ और जिसे मैं नही…
अब हाल उनका मालूम पड़ता है अखबारों से हमने दर्द को रिसते देखा है दरारों से छतों को उखाड़ के ले गए घरों की हमारी हमने बरसात गुजारी है इन दीवारों से शहर छोड़ देते हम भी ओरों की तरह नाव बढ़ न सकी…
खामोश जिस्म में भी जान अभी बाकी है तेरी वफाओं का निशान अभी बाकी है थम गयी दिल में हरारत जो तेरे दम से थी बुझे से दिल में भी अरमान अभी बाकी है हिल गया मेरा आशियाना इन थपेड़ो से आने वाला बड़ा तूफ़ान अ…
सर्दी में पुरानी पुलिया के नीचे जो फ़कीर रहता था मर गया आज लोग आ रहें हैं जा रहें हैं भीड़ जमा है पुलिया पे गुजरते हुये देख लेते हैं लोग झाँक कर एक पल नीचे कोतुहल होता है देखने का पर रुकने का …
कल की रात सबसे हसीन रात थी उसने चूमा मेरे गुलाबी होठों को एक एहसास एक ज़ुम्बिश रोम रोम में सिहरन और वो घबराहट भी पता नहीं कैसी मैं अन्दर से अभिभूत थी और एक अनजाना डर भी पता नहीं क्या था वो जो असीम आका…